प्राचीन भारत का इतिहास हिंदी में

 प्राचीन भारत का इतिहास







प्रागैतिहासिक काल








★मनुष्य ने जिस काल में घटनाओं का कोई लिखित विवरण उद्धृत नहीं किया उसे प्रागैतिहासिक काल कहते हैं

★भारतीय प्रागौतिहासिक काल मुख्यतः तीन वर्गों में इस प्रकार विभाजित है— पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग।

★पाषाण युग तीन भागों में विभाजित है—पुरापाषाण युग, मध्य पाषाण युग, और नवपाषाण युग।

★ज्ञानी मनुष्य(होमो सैपियंस) का प्रादुर्भाव इस धरती पर आज से लगभग 30 या 40000 वर्ष पूर्व माना जाता है।

★मनुष्य ने सबसे पहले तांबे का प्रयोग प्रारंभ किया था। उसके द्वारा बनाया जाने वाला प्रथम औजार कुल्हाड़ी था। जिसका प्राप्तिस्थल  अतिरम्पक्कम था।

★पुरापाषाण युग के मनुष्य की जीविका का मुख्य आधार शिकार था।

★मानव के अंदर स्वयं की सुरक्षा हेतु निवास बनाने की प्रवृत्ति का विकास नवपाषाण काल में हुआ।

★मनुष्य के द्वारा सबसे पहले कुत्ते को पालतू बनाया गया।

★अग्नि का आविष्कार पुरापाषाण युग के मानव द्वारा किया गया था। पहिए का आविष्कार नवपाषाण युग में हुआ था।

★प्रागैतिहासिक अन्न उत्पादक स्थल मेहरगढ़ पश्चिम बलूचिस्तान में अवस्थित है। कृषि में सबसे पहले अपनाई गई प्राचीन फसल गेहूं एवं जौ थी।

★निम्न पुरापाषाण युग: हिम युग का सबसे बड़ा भाग किसके अंतर्गत आता है।

★इस युग के मानव का भोजन फल पक्षियों और जानवरों का कच्चा मांस इत्यादि था।

★शिकार करने के लिए हथियार प्राय: कठोर चट्टानों से बनाए जाते थे।

★मध्य पाषाण युग: इस युग में हथियारों के आकार और रूप में थोड़ा परिवर्तन हुआ। इस युग में पत्थरों और हड्डियों से हथियार बनाए जाने लगे।

★उच्च पुरा— पाषाण युग: इस युग के लोग घुमंतू शिकारी और संग्रहकर्ता के रूप में रहने लगे।

★मध्य पाषाण युग: इस युग में पाषाण की माध्यमिक अवस्था थी इस युग का अंत कृषि के परिचय से हुआ।

★नवपाषाण युग: इस युग में तराशे गए हथियारों की संस्कृति विकसित हुई।

★हथियारों का निर्माण लोगों का एक महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया और विभिन्न प्रकार के तराशे गए हथियार निर्मित किए जाने लगे।

★लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सीखी। उनके बर्तन अच्छी तरह निर्मित तथा चित्रों से सुसज्जित होते थे।

★उन्होंने पत्थरों के घर से आग को उत्पन्न करने की कला सीखी। चक्के का निर्माण भी इस युग की एक महत्वपूर्ण खोज थी।

★ताम्र पाषाण युग: ताम्र(तांबा) के प्रयोग के कारण यह युग ताम्र युग कहलाया। अर्थव्यवस्था का आधार कृषि कार्य, पशुपालन, शिकार और मत्स्य पालन था।

★ताम्र पाषाण युग के लोग आहार के लिए पशुओं का शिकार करने लगे। उन्होंने दूध– पदार्थों के लिए मवेशियों को नहीं पाला। वे पशुओं का न तो दूध निकालते थे और न ही जुताई में प्रयोग करते थे।

★इस युग में कांस्य और पत्थर के हथियार प्रयोग में लाए जाते थे। अब लोगों ने स्वयं के रहने के लिए घरों का निर्माण कर सुव्यवस्थित जीवन जीना शुरु कर दिया।

★लौह युग: यह प्रागैतिहासिक  काल का अंतिम प्रधान काल था।

★इस काल में लोगों ने लोहे से बने हथियारों एवं हजारों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। इसलिए इस काल को लौह युग कहा जाता है। इस युग में कृषि, कार्य धार्मिक विश्वास एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए।

★लौह युग के साधारणत: धूसर रंग से रंगे गए बर्तनों से संबंधित है।

★लौह के उपयोग से समाज, कृषि व्यवस्था, धार्मिक विश्वास और आकर्षक कलात्मक शैली में विभिन्न परिवर्तन हुए।

★इस युग का शुभारंभ छठी शताब्दी ईसा पश्चात् उत्तरी यूरोप में आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में केंद्रीय यूरोप में, एवं 12वीं शताब्दी ईसा पूर्व में आधुनिक ईरान, पुरातन भारत एवं पुरातन ग्रीस में हुआ।


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