प्राचीन भारत के धार्मिक आंदोलन, prachin Bharat ke dharmik aandolan

प्राचीन भारत के धार्मिक आंदोलन के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सभी परीक्षाओं के लिए है जरूरी, prachin Bharat ke dharmik andolan ke mahatvpurn prashn Uttar sabhi parikshaon ke liye hai jaruri.









 




धार्मिक आंदोलन


★धार्मिक आंदोलन 600 ईसा पूर्व में अस्तित्व में आया।

★इस आंदोलन का मुख्य कारण ब्राह्मणों के आधिपत्य के विरुद्ध प्रतिक्रिया के फलस्वरुप और उत्तरपूर्व में कृषि अर्थव्यवस्था के विस्तार का परिणाम था।




जैन धर्म—


★संस्थापक ऋषभदेव प्रथम तीर्थ कौन थे।

★महावीर स्वामी का जन्म 540 ईसा पूर्व कुण्डाग्राम (वैशाली) में हुआ।

★महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था। इन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में माता- पिता की मृत्यु के बाद संन्यास ग्रहण किया।

★महावीर स्वामी ने अपने उपदेश प्राकृत भाषा अद्र्धमागधी में दीए।

जैन धर्म के त्रिरत्नो के नाम इस प्रकार हैं–

1. सम्यक दर्शन।      2. सम्यक ज्ञान।     3. सम्यक आचरण।

★जैन धर्म के पंच महाव्रत है- अहिंसा, सत्यवक्त, अस्तेय, अपरिग्रह एवं ब्रह्मचर्य।

★जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर काशी के इक्ष्वाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुत्र पार्श्वनाथ थे। इनके द्वारा दी गई शिक्षा थी-       1. हिंसा ना करना, 2. सदा सत्य बोलना, 3. चोरी ना करना एवं , 4. संपत्ति ना रखना,  5. ब्रह्मचर्य।

★जैन धर्म आत्मा को मान्यता प्रदान करता है।

★खजुराहो के जैन मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासकों के द्वारा किया गया था।

★मौर्योत्तर युग में मथुरा जैन धर्म का प्रसिद्ध केंद्र था।

★जैन धर्म ईश्वर में विश्वास नहीं रखता है।




जैन धर्म के प्रमुख तीर्थकर एवं प्रतीक – चिन्ह



तीर्थकर का नाम                        प्रतीक- चिन्ह                  ऋषभदेव (पहले)                       सांड़                            अजीतनाथ (दूसरे)                     हाथी                          संभव (तीसरे)                            घोड़ा                        संपाश्र्व (सातवें)                     स्वस्तिक                            शांति (सोलहवें)                       हिरण                                 नामि (इक्कीसवें)                     नीलकमल                        पाश्र्व (तेईसवें)                        सर्प                                  महावीर (चौबीसवें)                  सिंह 





★महावीर 24 तीर्थकारों में अंतिम तीर्थकार थे। इन्हें 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद जृम्भिक पास ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ।

★जैन धर्म चंद्रगुप्त मौर्य काल में दो पंथों में विभक्त हो गया – श्वेतांबर और दिगंबर ।

★पहली परिषद 300 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र के द्वारा आयोजित की गई।

★दूसरी परिषद छठी शताब्दी में बल्लवी (गुजरात) में देवारधि क्षमाश्रवण के नेतृत्व में हुई।

★468 ईसा पूर्व बिहार राज्य के पावापुरी (राजगीर) में 72 वर्ष की आयु में महावीर ने निर्वाण (मृत्यु) प्राप्त किया।





बौद्ध धर्म —


★बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे।

★गौतम बुध का जन्म 563 ईसा पूर्व कपिलवस्तु लुंबिनी नामक जगह पर हुआ था।

★गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

★उनके पिता साथ गण राज्य के शासक थे, जिनका नाम शुद्धोधन  था और माता का नाम महामाया था।

★गौतम बुध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा नामक सुंदर कन्या के साथ हुआ। उनके पुत्र का नाम राहुल था।




सिद्धार्थ को कपिलवस्तु का भ्रमण करते समय ये चार दृश्य दिखे–


 1. एक बूढ़ा व्यक्ति                                                         2. एक बीमार व्यक्ति                                                       3. एक मृतक एवं                                                           4. एक सन्यासी                                

★सिद्धार्थ को 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात्रि निरंजना (फल्गु) नदी के कि weनारे पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई।

★ज्ञान प्राप्ति का स्थान बोधगया (बिहार) कहलाया।

★गौतम बुद्ध ने प्रथम उपदेश सारनाथ (वाराणसी) नामक स्थान पर दिया था। बुद्ध धर्म इसे धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया।

★गौतम बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पाली में दीए।

★बौद्ध धर्म का ईश्वर में विश्वास नहीं है। इस धर्म में आत्मा की परिकल्पना भी नहीं की गई है। जबकि इस धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।

★बौद्ध धर्म के त्रिरत्न इस प्रकार है – बुद्ध, धम्म एवं संघ।

★विश्व दुखों से भरा है इस सिद्धांत को बुद्ध ने उपनिषद से उद्धृत किया।

★बौद्ध धर्म तीन मुख्य पंथों में विभाजित हो गया – हीनयान, महायान और वज्रयान।

तीन त्रिपिटक – विनय पिटक (नियम और कानून जिसे बुद्ध ने फैलाया था), सुत्त पिटक (स्वयं बुद्ध के द्वारा दिए गए भाषण), और अभिधम्म पिटक (बौद्ध दर्शन) पर प्रकार डाला गया है ।

★जातक कथाएं बुद्ध के पुनर्जन्म की कहानियां है।

★गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण मल्लो कीराजधानी कुशीनगर उत्तर प्रदेश में 483 ईसा पूर्व में 80 वर्ष की अवस्था में हुई।





शैल धर्म–


★ऋग्वेद में शिव के लिए रूद्र नामक देवता का उल्लेख है।

★एक संप्रदाय के रूप में शैव धर्म का प्रारंभ शुंग सातवाहन काल से हुआ।

★शैव संप्रदायों का सर्वप्रथम उल्लेख, पतंजलि के महाभावय में शिव भागवत के नाम से हुआ।

★लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है।

★दक्षिण भारत में शैव धर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव एवं चोलों के काल में लोकप्रिय हुआ।

★शैव धर्म का प्रचार आडियार संतों ने किया, यह संख्या में 63 थे।

★एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूटो के द्वारा करवाया गया था।

★वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है –       1. शैल, 2. पशुपति, 3. कापालिक, 4. कालामुख। 




वैष्णव धर्म—


★वैष्णव धर्म के प्रवर्तक कृष्ण थे।

★छांदोग्य उपनिषद में श्री कृष्ण का सर्वप्रथम उल्लेख किया गया।

★इस धर्म का उद्भव मौर्योत्तर काल में हुआ।

★वैष्णव धर्म में सर्वाधिक महत्व भक्ति को माना गया है।

★कृष्ण को मेगास्थनीज ने हेराक्लीज कहा।

★अलवार दक्षिण भारत के वैष्णव संत थे।




इस्लाम धर्म–


★इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद साहब थे।

★पैगंबर मोहम्मद साहब ने कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया था।

★हजरत मोहम्मद साहब की मृत्यु के उपरांत इस्लाम धर्म शिया तथा सुन्नी नामक दो पंथों में विभाजित हो गया।

★पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म-दिन पर ईद- ए- मिलाद- उन- नबी मनाया जाता है।

★कुरान इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है।

★हजरत मोहम्मद साहब को 610 ईसवी में मक्का के पास हीरा नामक गुफा में ज्ञान प्राप्ति हुई।

★ईसाई धर्म

★ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह हैं।

★ईसाई धर्म का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ बाइबिल है।

★रोमन गवर्नर पोंटियस ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया था।

★ईसा मसीह का जन्म दिवस क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है।

★ईसा मसीह की माता का नाम ‘मेरी' एवं पिता का नाम ‘जोसेफ' था।

★ईसाई धर्म का सबसे पवित्र चिन्ह क्रश है।

★ईसा मसीह ने अपने जीवन के प्रथम 30 वर्ष एक बढ़ई के रूप में बैथलेहम के निकट नाजरेथ में व्यतीत की किए।




सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण नोट्स


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उत्तर वैदिक काल के नोट्स

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उत्तर वैदिक काल (1000–600 ईसा पूर्व)


★उत्तर वैदिक काल में समाज चार वर्णों में विभाजित हो गया। ये वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र कहलाए।

★सभी तीन उच्च वर्ण एक जैसे रंग- रूप वाले थे, वे द्विज (पुन: र्जन्म) के रूप में जाने जाते थे।

★चौथा वर्ण पवित्र धागे (जनेऊ) के समारोह से वंचित था और इस कारणवश शूद्रों के ऊपर अयोग्यता का आरोपण शुरू हो गया।

★शूद्रों के लिए समाज में बुरी स्थिति कायम हो गई। वे दूसरों के नौकर कहे जाने लगे।

★उत्तर वैदिक काल में राजा की राज्याभिषेक के समय ‘राजसूय यज्ञ' यज्ञ नामक अनुष्ठान होता था।

★साधारणत: स्त्रियों को निम्न स्थिति प्रदान की गई।

★उत्तर वैदिक काल का सांख्य दर्शन भारत के सभी दर्शनों में सबसे प्राचीन है। इसके अनुसार मूल तत्व 25 है जिनमें प्रकृति प्रथम तत्व है।

★उत्तर वैदिक काल में आश्रम या जीवन के चार चरणों की रचना की गई।                                                                         (1) ब्रम्हचर्य या विद्यार्थी जीवन,                                       (2) गृहस्थ या घर का स्वामी,                                           (3) वानप्रस्थ या आंशिक सेवानिवृत्त,                                 (4) संन्यास या पूर्ण रूप से संसार के कर्मों से निवृत्त,        

★उत्तर वैदिक काल में वर्ण, व्यक्ति के कार्य या व्यवसाय के बजाय जन्म के आधार पर निर्धारित होने लगे।





ऋग्वेद की रचना के संदर्भ में विभिन्न मत—



मैक्समूलर                 —               1200   1800। बाल गंगाधर तिलक            —                     600 ईसा पूर्व।     जैकोवी                    —                 300 ईसा पूर्व। विंटरनित्ज                 —                   2500 ईसा पूर्व







शतपथ ब्राह्मण में 12 रत्निज—       



 (1) युवराज                                                                  (2) पालागल     –     राजा का मित्र एवं विदूषक का पूर्वज      (3) सूत            –      सारथी                                            (4) छत्र            –      पतिहारी                                          (5)  राजा                                                                      (6) भाग दूध      –     कर संग्रह करने वाला                          (7)  सेनानी        –    सेनापति                                          (8)  महिषी        –     पटरानी                                          (9) ग्रामीण        –      लड़ने वाले दल का नेता                      (10) पुरोहित     –      मंत्री                                              (11) संग्रहीता   –     कोषाध्यक्ष                                      (12) अक्षावाप  –   पासे के खेल में राजा का सहयोग करने                                वाला







विवाह के विभिन्न प्रकार—


असुर— कन्या को खरीद कर किया गया विवाह।

गंधर्व— दो पक्षों की स्वीकृति से और प्राय: गुप्त रूप से किया गया विवाह गंधर्व विवाह है। गंधर्व विवाह का विशेष उदाहरण स्वयंवर या स्वेच्छा से चयनित पात्र से विवाह है।

ब्रह्म— कन्या पक्ष के द्वारा उपयुक्त दहेज देकर कन्या के उसी वर्ण के पुरुष के साथ वैदिक संस्कार और अनुष्ठान के साथ किया गया विवाह।

दैव— पिता अपनी पुत्री को यज्ञीय पुरोहितों को शुल्क या दक्षिणा के रूप में दे तो ऐसे विवाह को दैव विवाह करते हैं।

अर्श— वधू की कीमत के रूप में एक गाय या एक बैल दिया जाता है।

प्रजापति— दहेज या वधू की कीमत लिए बिना किया गया विवाह।

पैशाच— यदि एक लड़की का सतीत्व हरण उस समय किया गया हो जब वह निद्रा में हो या मानसिक रूप से विक्षिप्त हो या नशे में हो।

राक्षस— कन्या (लड़की) से विवाह उसे पकड़कर या कैद में रखकर करना। 

★उत्तर वैदिक काल में प्रजापति (ब्रह्मा) को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।

★गोत्र नामक संस्था उत्तरवैदिक काल से प्रचलन में आयी।





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वैदिक काल

★वैदिक काल या वैदिक युग उस काल को निर्देशित करता है     जब भारत में वैदिक संस्कृत के ग्रंथों की रचना की गई थी।

★शाब्दिक रूप में आर्य का अर्थ है– अच्छा या श्रेष्ठ।

★अनुमानतः आर्य मध्य एशिया से प्रवासी के रूप में भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न चरणों में 2000 से 1500 ईसा पूर्व के दौरान आए।

★अपना प्रभुत्व सिद्ध करने के क्रम में आर्यों ने अपने आपको आर्य कहां और अपने विरोधियों को उन्होंने अनार्य दस्यु और दास कहां।

★ऋग्वेद (1500 से 2000 ईसा पूर्व) में 10 मंडल 1028 सूक्त एवं 10462 ऋचाएं हैं। यह मंत्र विभिन्न देवताओं के सम्मान में गाए जाते थे। और होतृ के द्वारा उच्चरित किए जाते थे।

★गायत्री मंत्र को ऋग्वेद से लिया गया है।

★सिंधु और उसकी सहायक नदियां सप्तसिंधु कही जाती है।

★यजुर्वेद यज्ञीय प्रार्थना का एक ग्रंथ है। यह गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है।

★इस ग्रंथ के मंत्र यज्ञ के अवसर पर गाए जाते हैं।

★सामवेद में 1549 मंत्र संकलित हैं।

★अथर्ववेद जादुई सूत्रों का ग्रंथ है जिसमें उस समय के सम्मेलन का अनुष्ठान का वर्णन है।

★ब्राह्मण: ग्रंथों की रचना वेदों के बाद वेदों के मंत्र की व्याख्या करने के लिए की गई। यह गद्य में लिखे गए और इनके स्वरूप अनुष्ठानिक हैं।




वैदिक सभ्यता की समय सीमा का विभाजन किस प्रकार किया गया है–



रिग वैदिक काल:— (1500 से 1000 ईसा पूर्व )

उत्तर वैदिक काल:—(1000 से 600 ईसा पूर्व)

★पंजाब एवं अफगानिस्तान दो ऐसे क्षेत्र है, जहां आर्य सर्वप्रथम बसे।

★मैक्स मूलर ने यह माना है कि आर्यों का मूल निवास– स्थान मध्य एशिया था।

★आर्यों के द्वारा विकसित की गई सभ्यता को ही वैदिक सभ्यता के नाम से जाना जाता है।

★आर्यों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली भाषा संस्कृति थी।

★स्त्रियां भी शिक्षा ग्रहण करते थी। ऋग्वेद में लोपामुद्रा, घोषणा, सिकता, आपला एवं विश्वास जैसे विदुषी स्त्रियों का वर्णन मिलता है।

★वैदिक सभ्यता में बाल विवाह एवं पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था।

★विधवा स्त्री अपने दिवंगत पति के छोटे भाई अर्थात देवर से विवाह कर सकती थी।

★आर्य सोमरस नामक पदार्थ को पेय पदार्थ के रूप में प्रयोग करते थे। इसका निर्माण वनस्पति से किया जाता था।

★संगीत घुड़दौड़ रथदौड़ एवं द्य़ूतक्रीडा आर्यों के मनोरंजन के प्रमुख साधन माने जाते थे।




आर्य मुख्यतः तीन प्रकार के वस्त्र पहनते थे–



1.  वास 2.अधिवास और 3. उष्णीय। अंदर पहनने वाले कपड़े को नीवि कहा जाता था।

★आर्यों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। आर्य कृषि भी करते थे।

★आर्यों में सर्वाधिक प्रिय देवता इंद्र थे।

★आर्यों का सर्वाधिक प्रिय पशु घोड़ा था।

★आर्य अग्नि देव की पूजा करते थे। उनका मानना था कि अग्निदेव मनुष्य एवं देवता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निर्वाह करते हैं।

‘★सत्यमेव जयते’ मुंडकोपनिषद से लिया गया है। मुंडकोपनिषद अथर्ववेद से ग्रहण किया गया है।

★आर्यों द्वारा खोजी गई धातु लोहा थी, जिसे ‘श्याम अयस’ कहा जाता है।

★गायत्री मंत्र का संबंध ऋग्वेद से है। यह सावितृ नमक देवता को संबोधित मंत्र है।

★वैदिक काल में ‘रामायण' एवं ‘महाभारत' दो महाकाव्यों का सृजन हुआ।

★‘महाभारत’ संसार का सबसे बड़ा महाकाव्य है। इसका पुरातन नाम जयसंहिता है।






वेद और उनके ब्राम्हण

वेद                                     ब्राम्हण





ऋग्वेद — एतेरेय और कौशितिकी या सांख्य

सामवेद — पंचविश ( ताण्ड्य महा ब्राह्मण)

षड्विंश — ब्राम्हण, जैमिनिय ब्राम्हण।

यजुर्वेद — शतपथ (सबसे प्राचीन और सबसे वृहद ब्राम्हण)                     और तैतेरिय

अथर्ववेद — गोपथ (चिकित्सा विज्ञान, सौंन्दर और जादू पर                       एक रचना)

★आरण्यक मुख्यत: साधु - संतों और जंगलों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए लिखे गए।

★गाय को ना मारने जाने वाले पशु की श्रेणी में रखा गया था। वेदों में गाय की हत्या करने के लिए मृत्युदंड या देश निकाले की  व्यवस्था है।

★उपनिषदों  में धार्मिक अनुष्ठान के विपरीत ब्रह्म (ईश्वर) और जीव प्राणी के बीच संबंधों के विषय में चर्चा है।

★उपनिषद दार्शनिक संग्रह है और इन्हें वेदांत कहा गया है। क्योंकि वेदों के बाद इनकी रचना हुई।

★बृहदारण्यक 108 उपनिषदों में सबसे प्राचीन उपनिषद है।

★ऋग्वेद के अनुसार प्रसिद्ध दास- राजन  युद्ध या 10 राजाओं के मध्य का युद्ध सूद,तित्सु परिवार में राजा भारत एवं 10 सुप्रसिद्ध जनजातिया के संघ पुरु, यदु, तुर्वस अनु द्रुह्यु, अलीने, पाकठ  बह्लन, विषनिन के मध्य हुआ।

★परूषिणी नदी के किनारे लड़े गए इस रक्त रंजित और निर्णयात्मक युद्ध में भरत विजई हुए।

★सभा और समिति (लोकप्रिय सभाएं) वैदिक राज्यों की कार्यवाहीयों को नियंत्रित करती थी।

★इन दो सभाओं को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया।






 आर्यों की प्रशासनिक इकाई क्रमशः पांच भागों में बटी थी—



1. कुल – परिवार   2. ग्राम – गांव     3. विश – गोत्र          4. जन – लोग       5. राष्ट्र – देश

★वैदिक आर्य प्रकृति की शक्तियों की पूजा करते थे, जैसे– पृथ्वी, अग्नि, हवा (वायु), वर्षा (मेघ) और बिजली (वज्र)। उनका मुख्य पेशा पशु-पालन था।

★राजा जनजातियों की सुरक्षा के लिए उत्तरदाई था।

★युद्ध में कबीले का नेतृत्व राजा करता था।

★वेदांग की रचना उत्तर वैदिक काल के दौरान हुई। शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष 6 वेदांग है।

शिक्षा         —      स्वर विज्ञान।                                        कल्प          —        अनुष्ठान।                                         व्याकरण     —          व्याकरण।                                     निरुक्त        —         शब्द शास्त्र।                                     छंद            —            छंद।                                             ज्योतिष       —             ज्योतिष।                                 





       

उपवेदों की रचना वेदांगो के बाद हुई।



4 उपवेद है —                                                                    उपवेद                                  संबंधित वेद                  आयुर्वेद (औषधि)    ‌‌   ‌ —         ऋग्वेद।                            धनुर्वेद (तीरंदाजी)     ‌‌   —         याजुर्वेद।                          गंधर्ववेद (संगीत)          —          सामवेद।                          शिल्पवेद (शिल्प)          —          अथर्ववेद।           

★पुराण का अर्थ है ‘पुराना’ और इनकी संख्या 18 है।

★‘अष्टाध्यायी’ पाणिनि के द्वारा लिखी गई पूरे विश्व की पहली व्याकरण की पुस्तक है।

★‘रामायण’ और ‘महाभारत’ दो भारती महाकाव्य हैं ।

★दर्शन, वेदों के सहायक निबंध है। भारतीय दर्शन की 6 शाखाएं हैं जिन्हें षड्दर्शन कहा जाता है।






षड़दर्शन                                                                                  न्याय दर्शन           —            अक्षपाद गौतम।                     वैशेषिक           —              महर्षि कणाद।                     सांख्य दर्शन          —               कपिल मुनि।                       योग दर्शन           —          पतंजलि।                               पूर्वमीमांस            —               जैमिनी                              उत्तर मीमांसा       —            बदरायण ऋषि

★शाब्दिक रूप से स्मृति का अर्थ होता है स्मरण। सभी स्मृतियों की रचना गुप्त काल के दौरान हुई।


ऋग्वैदिककालीन देवता एवं उनका संबंध                             देवता                                      संबंध          



पूषण             —            जानवरों के देवता                       अग्नि             —        देवता एवं मनुष्य के बीच मध्यस्थ      उषा               —        प्रगति एवं उत्थान के देवता            वरुण             —        विश्व के नियमक एवं शासक।         मरुत             —       आंधी– तूफान के देवता।         ‌‌‌     धरयौ            —        आकाश के देवता (सबसे प्राचीन)।      ‌ इंद्र               —        युद्ध एवं वर्षा के देवता।     ‌‌‌                सोम              —        वनस्पति के देवता।          ‌‌‌            अश्विन          —        विपत्तियों को दूर करने वाले देवता।      विष्णु            —         विश्व के पालन करता है।  






प्राचीन नदियां और उनके आधुनिक नाम—          



    वितस्ता                          झेलम                                       अस्किनी                        चिनाव।                                     परुष्णी।                         रावी।               ‌‌                        विपाशा                           व्यास।                                      सतद्रु                              सतजल।         ‌‌‌                          गोमती                            गोमल।    ‌।                                कुभा                             काबुल।                                    सदानीरा                         गंडक।                                      सरस्वती                    ‌‌     घ‌ग्गर




प्राचीन भारत का इतिहास प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण नोट्स


 सभी परीक्षाओं के लिए उपयोगी , जीव विज्ञान के 30


 महत्वपूर्ण प्रश्न सभी परीक्षाओं के लिए रसायन विज्ञान के 30


 महत्वपूर्ण प्रश्न सभी परीक्षाओं के लिए

सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण नोट्स

 









सिंधु घाटी सभ्यता




★भारत का प्राचीनतम नगर मोहनजोदड़ो था। मोहनजोदड़ो का सिंधी भाषा में अर्थ है— मृतकों का टीला।


सिंधु कॉल में विदेशों के साथ व्यापार–

आयातित वस्तुओं का नाम                   क्षेत्र

1.शीशा     ‌‌                                       ईरान

2.तांबा           ‌‌                          बलूचिस्तान, खेतड़ी,ओमान

3.लाजवर्द                                     मेसोपोटामिया

4.सोना                                      अफगानिस्तान, ईरान एवं                                                   कर्नाटक

5.गोमेद                                      सौराष्ट्र

6.चांदी                                       ईरान, अफगानिस्तान


★सिंधु घाटी सभ्यता की सर्वमान्य तिथि 2400 ईसा पूर्व से 17 ईसा पूर्व मानी जाती है।

★सिंधु सभ्यता की खोज का श्रेय रायबहादुर दयाराम साहनी को प्रदान किया जाता है।

★सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख बंदरगाह थे। उनके नाम है– लोथल एवं सुतकोतदा।

★सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत संभवत मोहनजोदड़ो में पाई गई अन्नागार है।

★सिंधु सभ्यता के लोग प्रमुखता गेहूं एवं जौ की खेती करते थे। रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं जिससे धान की खेती होने का प्रमाण मिलता है।

★सिंधु सभ्यता के लोग पृथ्वी की पूजा किया करते थे। वह पृथ्वी को उर्वरता की देवी मानते थे।

★सिंधु सभ्यता के लोग मातृ देवी की सर्वाधिक पूजा किया करते थे।

★सिंधु घाटी सभ्यता के लोग सूती एवं ऊनी वस्तुओं का प्रयोग किया करते थे।

★सिंधु घाटी सभ्यता के विनाश का कारण संभवत: बाढ़ थी।

★सिंधु घाटी सभ्यता एक अनोखी कांस्य युगीन सभ्यता थी और पूरे विश्व की नगरी सभ्यताओं में से एक प्राचीनतम सभ्यता थी।

★यह सभ्यता सिंधु नदी की घाटियों और इसकी सहायक नदियों(धाराओ) के आसपास पल्लवित हुई जो आधुनिक पाकिस्तान और उत्तर पश्चिमी भारत में स्थित है।

★सिंधु सभ्यता की लिपि चित्रात्मक है। यह लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी। एक से ज्यादा पंक्तियों का अभिलेख होने पर प्रथम पंक्ति दाएं से बाएं तथा दूसरी बाएं से दाएं और लिखी जाती थी।

★मुख्य सड़कें जरूरत के अनुसार उत्तर से दक्षिण तक 9 फीट से लेकर 34 फीट तक चौड़ी होती थी। विशेष रूप से मोहनजोदड़ो की सड़कों की चौड़ाई 10.5 फीट तक थी। हड़प्पा की सड़कों की चौड़ाई 30 फीट तक थी।

★सैंधव सभ्यता के लोग यातायात हेतु दो एवं चार पहियों वाली बैलगाड़ी यह भैंस गाड़ी का प्रयोग करते थे।

★घर प्राय: 2 मंजिले, बड़े और सड़कों के किनारे कतारों में बने होते थे। घरों में नालियों की सुंदर व्यवस्था थी। ये नालियां ईंटों से बनी पाइप के द्वारा गंदे पानी को घर से बाहर निकालने में सहायक थी।

★हड़प्पा कालीन सभ्यता के नगरों में लोथल बालाकोट, सुतकागेंडोर और अल्हादी(पाकिस्तान) आदि स्थलों पर बड़े बंदरगाह थे।

★पालतू पशुओं के अंतर्गत कुत्ते, बिल्लियां, कूबड़ वाले पशु(सांड), समुद्री जानवर, मुर्गियां और संभवतः सुअर ऊंट और भैंस आदि थे। संभवतः हाथी भी पालतू पशु थे क्योंकि इनकी हड्डियों और बाह्य दातों का प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया जाता था।

★सेंधववासी मीठे के तौर पर शहद का प्रयोग करते थे।

★समाज में स्त्रियों को उचित सम्मान प्राप्त था। परिवार माता के नाम से चलते थे।

★सैंधव सभ्यता में चार विभिन्न वर्ग थे। समाज इन में विभाजित था— विद्वान, योद्धा, व्यापारी और मजदूर।

★सिंधु घाटी के लोग सच्चाई पर आधारित कृषि करते थे।

★सैंधव सभ्यता के लोग मनोरंजन हेतु मछली पकड़ने, शिकार करने, पशु– पक्षियों के आपस में लड़ाने तथा चौपड़– पासा खेलने आदि साधनों का प्रयोग करते थे।

★हड़प्पा के लोग हिंदू धर्म को मानने वाले थे। वे मातृदेवी, पशुपति शिव, पवित्र जानवर और वृक्षों आदि की पूजा करते थे।

★सैंधव सभ्यता में शवों को जलाने एवं गाड़ने की, दोनों प्रथाएं प्रचलित थी।

★मोहनजोदड़ो में एक भव्य स्नानागार था जिसका प्रयोग सामान्य जनता के द्वारा स्नान के लिए किया जाता था। यह 11.88 मीटर लंबा, 7.01 मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है।


सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं सन और उत्खनन कर्ता–

1.हड़प्पा के उत्खनन कर्ता थे– दयाराम साहनी 1921

2.मोहनजोदड़ो के उत्खनन कर्ता थे– आर डी बनर्जी 1922

3.सुतकागेंडोर के उत्खनन कर्ता थे– औरेल स्टैन जार्ज 1927

4.चन्हूदडों के उत्खनन कर्ता थे– वायरस 1931, एसआर राव 1953

5.कोटदीजी के उत्खनन करते थे– फजल अहमद 1953

6.दवरकोट के उत्खनन कर्ता थे– मैच्की 1935

7.किलीगुल मोहम्मद के उत्खनन कर्ता थे– फैरसेरमिस 1950

8.कालीबंगन के उत्खनन करते थे– ए घोष 1953

9.रोपड़ के उत्खनन करते थे– वाइ डी शर्मा 1953

10.सुरकोटड़ा के उत्खनन कर्ता थे– जगतपति घोष 1964

11.धौलावीरा के उत्खनन कर्ता थे– आर एस विष्ट 1990- 91

12.आलमगीरपुर के उत्खनन करते थे– वाई डी शर्मा 1958


प्रमुख स्थल और वर्तमान क्षेत्र (स्थिति)–

1.मोहनजोदड़ो का प्रमुख स्थल था– सिंध (पाकिस्तान)

2.हड़प्पा का प्रमुख स्थल– पंजाब प्रांत (पाकिस्तान)

3.धौलावीरा का प्रमुख स्थल– कच्छ का रन (गुजरात)

4.लोथल का प्रमुख स्थल– खम्बात की खाड़ी (गुजरात)

5.राखीगढ़ी का प्रमुख स्थल– हरियाणा

6.गनवरी वाला का प्रमुख स्थल– पंजाब (पाकिस्तान)

प्राचीन भारत का इतिहास हिंदी में

 प्राचीन भारत का इतिहास







प्रागैतिहासिक काल








★मनुष्य ने जिस काल में घटनाओं का कोई लिखित विवरण उद्धृत नहीं किया उसे प्रागैतिहासिक काल कहते हैं

★भारतीय प्रागौतिहासिक काल मुख्यतः तीन वर्गों में इस प्रकार विभाजित है— पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग।

★पाषाण युग तीन भागों में विभाजित है—पुरापाषाण युग, मध्य पाषाण युग, और नवपाषाण युग।

★ज्ञानी मनुष्य(होमो सैपियंस) का प्रादुर्भाव इस धरती पर आज से लगभग 30 या 40000 वर्ष पूर्व माना जाता है।

★मनुष्य ने सबसे पहले तांबे का प्रयोग प्रारंभ किया था। उसके द्वारा बनाया जाने वाला प्रथम औजार कुल्हाड़ी था। जिसका प्राप्तिस्थल  अतिरम्पक्कम था।

★पुरापाषाण युग के मनुष्य की जीविका का मुख्य आधार शिकार था।

★मानव के अंदर स्वयं की सुरक्षा हेतु निवास बनाने की प्रवृत्ति का विकास नवपाषाण काल में हुआ।

★मनुष्य के द्वारा सबसे पहले कुत्ते को पालतू बनाया गया।

★अग्नि का आविष्कार पुरापाषाण युग के मानव द्वारा किया गया था। पहिए का आविष्कार नवपाषाण युग में हुआ था।

★प्रागैतिहासिक अन्न उत्पादक स्थल मेहरगढ़ पश्चिम बलूचिस्तान में अवस्थित है। कृषि में सबसे पहले अपनाई गई प्राचीन फसल गेहूं एवं जौ थी।

★निम्न पुरापाषाण युग: हिम युग का सबसे बड़ा भाग किसके अंतर्गत आता है।

★इस युग के मानव का भोजन फल पक्षियों और जानवरों का कच्चा मांस इत्यादि था।

★शिकार करने के लिए हथियार प्राय: कठोर चट्टानों से बनाए जाते थे।

★मध्य पाषाण युग: इस युग में हथियारों के आकार और रूप में थोड़ा परिवर्तन हुआ। इस युग में पत्थरों और हड्डियों से हथियार बनाए जाने लगे।

★उच्च पुरा— पाषाण युग: इस युग के लोग घुमंतू शिकारी और संग्रहकर्ता के रूप में रहने लगे।

★मध्य पाषाण युग: इस युग में पाषाण की माध्यमिक अवस्था थी इस युग का अंत कृषि के परिचय से हुआ।

★नवपाषाण युग: इस युग में तराशे गए हथियारों की संस्कृति विकसित हुई।

★हथियारों का निर्माण लोगों का एक महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया और विभिन्न प्रकार के तराशे गए हथियार निर्मित किए जाने लगे।

★लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सीखी। उनके बर्तन अच्छी तरह निर्मित तथा चित्रों से सुसज्जित होते थे।

★उन्होंने पत्थरों के घर से आग को उत्पन्न करने की कला सीखी। चक्के का निर्माण भी इस युग की एक महत्वपूर्ण खोज थी।

★ताम्र पाषाण युग: ताम्र(तांबा) के प्रयोग के कारण यह युग ताम्र युग कहलाया। अर्थव्यवस्था का आधार कृषि कार्य, पशुपालन, शिकार और मत्स्य पालन था।

★ताम्र पाषाण युग के लोग आहार के लिए पशुओं का शिकार करने लगे। उन्होंने दूध– पदार्थों के लिए मवेशियों को नहीं पाला। वे पशुओं का न तो दूध निकालते थे और न ही जुताई में प्रयोग करते थे।

★इस युग में कांस्य और पत्थर के हथियार प्रयोग में लाए जाते थे। अब लोगों ने स्वयं के रहने के लिए घरों का निर्माण कर सुव्यवस्थित जीवन जीना शुरु कर दिया।

★लौह युग: यह प्रागैतिहासिक  काल का अंतिम प्रधान काल था।

★इस काल में लोगों ने लोहे से बने हथियारों एवं हजारों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। इसलिए इस काल को लौह युग कहा जाता है। इस युग में कृषि, कार्य धार्मिक विश्वास एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए।

★लौह युग के साधारणत: धूसर रंग से रंगे गए बर्तनों से संबंधित है।

★लौह के उपयोग से समाज, कृषि व्यवस्था, धार्मिक विश्वास और आकर्षक कलात्मक शैली में विभिन्न परिवर्तन हुए।

★इस युग का शुभारंभ छठी शताब्दी ईसा पश्चात् उत्तरी यूरोप में आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में केंद्रीय यूरोप में, एवं 12वीं शताब्दी ईसा पूर्व में आधुनिक ईरान, पुरातन भारत एवं पुरातन ग्रीस में हुआ।


सामान्य विज्ञान

SSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षा में पूछे गए सामान्य विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न....










                part 1


1.टाइटन द्रव्य त्वचा की परत को जल के लिए अवैध बनाता है।


2.भारत के उत्तरी मैदानों की मृदा सामान्यतः तलोच्चन व्दारा बनी है।

3.सोयाबीन और मूंगफली खाद्य प्रोटीन के दो सबसे समृद्ध ज्ञात स्रोत है प्रोटीन एक जटिल कार्बनिक योगिक है जो 20 एमीनो अम्ल से मिलकर बनता है।

4.औधौगिक बध्दि: स्त्राव द्वारा किया जाने वाले जल प्रदूषण को रोकने के लिए पार्थेनियम  एवं हाथी घास को उपयोग पाया है।

5.बादल वायु के परिक्षेप माध्यम में जल बिंदु  कोलाइडी परिक्षेपण है।

6.पदार्थ की चौथी अवस्था प्लाज्मा है।

7.लैम्बर्ट नियम प्रदिप्ति  से संबंधित है।

8.द्रव्य का न सृजन किया जा सकता है ना विनाश, यह संरक्षण नियम से संबंधित है।

9.डेसिवल इकाई का प्रयोग ध्वनि की तीव्रता के लिए किया जाता है।

10.बैटरी में रासायनिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण होता है।

11.पैराफिन मोम पेट्रोलियम मोम है।

12.कोयले के पीट किस्म में मूल पादप द्रव्य के अभिज्ञेय अवशेष प्राप्त होते हैं।

13.लोहे का शुद्धतम रूप पिटवा लोहा है।

14.पारद धातु अन्य धातुओं के साथ अमलगम बनाती है।

15.कपड़ों और बर्तनों को साफ करने के लिए सल्फोनेट डिटर्जेन्ट में होते हैं।

16.यूरेनियम के रेडियोएक्टिव विघटन के फलस्वरुप अंततः सीसा बनता है।

17.बम बनाने के लिए फास्फोरस का प्रयोग किया जाता है।

18.रेडियो तरंगों का परावर्तन करने वाली वायुमंडलीय परत को आयनमंडल कहते हैं।

19.जर्मन सिल्वर एक जिंक, कॉपर और निकिल का मिश्रण धातु है।

20.शैल का कायांतरण स्लेट शैल में होता है।

21.कॉपर कुछ समय तक खुली हवा में पड़ी रहे तो उस पर हरे कार्बोनेट की परत बन जाती है।

22.अधिवकृक संह: संबंध रक्तचाप से है।

23.स्तनपायी जीवो में पाई जाने वाली लसीका वाहिनीया  संरचना शरीर को गर्म रखने में प्रत्यक्ष रूप से मदद करती हैं।

24.यक्ष्मा रोग प्राय:दूध के माध्यम से फैलता है।

25.सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगीकीकरण हरे पौधे हैं।

26.उत्तक संवर्धन का सही वर्णन उधान कृषि की फसलों का विकास और प्रसार है।

27.क्रायोजोनिक, निम्नतापमान से संबंधित है।

28.द्रव्यमान– ऊर्जा संबंध सापेक्षता का सम्मान सिद्धांत का निष्कर्ष है।

29.अतिलघु समय अंतरालो को सही– सही मापने के लिए पुल्सर का प्रयोग किया जाता है।

30.टॉर्च लाइट, इलेक्ट्रिक सेवर आदि जैसे उपकरणों में आमतौर पर प्रयुक्त चार्जेबल बैटरीयो में निकिल और कैडमियम काम करता है।

31.कीटोन निकाय घटक मूत्र का अपसामान्य घटक है।

32.लसीकरणु कोशिका प्रतिरक्षी पैदा करती है।

33.रक्त के स्कंदन में विटामिन (के) मदद करता है।

34.बहुत अधिक ऊंचाई पर मनुष्य की लार रुधिर कणिकाओं  का संख्या बढ़ जाती है।

35.टेस्टट्यूब बेबी का अर्थ पात्रे निषेचन और गर्भाशय में प्रतिरोषण है।

36.पूर्वी भारत के सुंदरबन मैन्ग्रोव परिस्थितिक तंत्र का एक उदाहरण है।

37.थर समीर और समुद्र समीर बनने का कारण संवहन है।

38.माध्यम के तापमान वृद्धि के साथ प्रकाश की चाल की गति वैसी ही रहती है।

39.शीतकाल में कपेउ हमें गर्म रखते हैं क्योंकि वह शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते हैं।

40.रेफ्रिजरेटर में शीतन संपीड़ित गैस के सहसा प्रसार के द्वारा होता है।

41.लघु तरंगों पर वायुमंडलीय विक्षोभ का प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए लघु तरंगों के प्रसार को दिर्घ तरंगों के प्रसारण की अपेक्षा अच्छी तरह सुन सकते हैं।

42.क्वार्टज कैलशियम सिलीकेट से बनता है।

43.व्यापारिक पवने विषुवतीय निम्न दाव से चलती है।

44.इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार नोल और रूस्का ने किया।

45.संवहनीय वर्षा विषुवतीय क्षेत्र में होती है।

46.डार्विन फिचिंग का प्रयोग पक्षियों के लिए किया जाता है।

47.किसी कमरे के एक कोने में सेंट की खुली शीशी रख देने से उसकी खुशबू कमरे के सभी भागों में विसरण के कारण फैल जाती है।

48.विकिरण के द्वारा मेधाच्छन्न रात की अपेक्षा निर्मल रात अधिक ठंडी होती है।

49.जन्म के बाद मानव के तंत्रिका ऊतक में कोई कोशिका विभाजन नहीं होता।

50.ध्वनि की गति सबसे तेज एलमुनियम में होती है।


प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण नोट्स , prachin Bharat ke mahatvpurn notes

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे सभी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण नोट्स, सभी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।












भारत : एक परिचय 


★ भारत स्थित है - उत्तरी गोलार्ध एवं पूर्वी देशांतर 

★ भारत की आकृति है - चतुष्कोणीय 

★ भारत का कुल क्षेत्रफल - 32,87, 263 वर्ग किमी 

★ भारत का क्षेत्रफल ‌‌‌‌(संपूर्ण विश्व का) - 2.42%

★ भारत की राजधानी - नई दिल्ली(1912 में, लॉर्ड हार्डिंग)

★ भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा - हिंदी

★ भारत में सबसे बड़ी जनजाति - गोंड (मध्य प्रदेश)

★ क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का स्थान विश्व में - सातवां

★ जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में भारत का स्थान - दूसरा

★ भारत का उत्तर से दक्षिण में विस्तार ‌‌- 3214 किलोमीटर

★ भारत का पूरब से पश्चिम में विस्तार - 2933 किलोमीटर 

★ भारत की सबसे पूर्वी बिंदु - वालांगु (अरुणाचल प्रदेश)

★ भारत की सबसे पश्चिमी बिंदु - सरक्रीक (गुजरात)

★ भारत की सबसे उत्तरी बिंदु - इंदिरा कॉल (जम्मू कश्मीर)

★ भारत की सबसे दक्षिणी बिंदु - इंदिरा पॉइंट या पिगमेलियन पॉइंट (निकोबार द्वीप समूह में)

★ भारत के दक्षिणी बिंदु ,भूमध्य रेखा से दूरी - 876 किलोमीटर

★ प्रायद्वीपीय भारत (मुख्य भूमि) का दक्षिणी नोक है - केप कोमोरिन (कन्याकुमारी , तमिलनाडु)

★ भारत में द्वीपों की कुल संख्या - 247 (204-बंगाल की खाड़ी में तथा 43- अरब सागर में)

★ लक्षद्वीप में दीपो की कुल संख्या - 36

★ भारत की स्थल सीमा की कुल लंबाई - 15200 किलोमीटर

★ भारत की टट्टी विभाग की कुल लंबाई - 7516.5 किलोमीटर

★ भारत की मुख्य भूमि के तटीय भाग की लंबाई - 6100 किलोमीटर

★ भारतीय मानक समय तथा ग्रीनविच समय के बीच अंतर है - 5 घंटा 30 मिनट (आगे)

★ सर्वाधिक राज्यों की सीमा को छूने वाला राज्य - उत्तर प्रदेश (8 राज्यों को)

★ समुद्र तट से लगे राज्यों की संख्या - 9

★ हिमालय को छूने वाले राज्यों की संख्या - 10

★ भारत की प्रदेशिक जल सीमा -  12 समुद्री मील 

★ एक समुद्री मील बराबर होता है - 1852 किलोमीटर 

★ भारत के मध्य से गुजरने वाली रेखा - कर्क रेखा

★ कर्क रेखा गुजरती है - 8 राज्यों से (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं मिजोरम)

★ सर्वाधिक नगरीकृत राज्य - गोवा

★ न्यूनतम नगरीकृत राज्य - हिमाचल प्रदेश

★ भारत में सर्वाधिक वर्षा होती है - मासिनराम (मेघालय)

★ भारत में न्यूनतम वर्षा होती है - लेह (कश्मीर)

★ भारत की सबसे प्राचीन पर्वत - अरावली (राजस्थान)

★ भारत की सबसे नवीन पर्वत - हिमालय (वलित पर्वत)

★ भारत का सर्वाधिक पूर्वी भाग - अरुणाचल प्रदेश (पुराना नाम– नेफा)








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